निबंध - आतंकवाद | कालाधन | प्रदूषण | BIHAR BOARD 2020 |
आतंकवाद
भारत दो दशकों से आतंकवाद से जूझ रहा है । इसी 'आतंकवाद' के चलते मई 1999 में पाकिस्तान के साथ भारत कारगिल में भिड़ा और 17 जुलाई को भारत ने विजय प्राप्त की। 23 जुलाई को भूतपूर्व प्रधानमंत्री अटल-बिहारी बाजपेयी ने कहा-"युद्ध खत्म हो गया, पर लड़ाई जारी है।" यह लड़ाई आतंकवाद के साथ है।अपना स्वार्थ सिद्धि के लिए आतंकवादी अनेक हथकंडे अपनाता है। सैनिक शिविरों घुसकर बम बिस्फोट करना, रॉकेट लांचरों से सैनिक शिवरों पर आक्रमण करना.में भीड़-भाडवाली जगहों पर बम विस्फोट करना, निर्दोष लोगों पर अंधा-धुंध गोलियाँ चलाना,मानव बमों से महत्त्वपूर्ण राजनेताओं को मारने की साजिश करना, संसद भवन में घुसने का दुस्साहस करना ही आतंकवादी गतिविधियों कहलाती है। भारत भी अपने संकल्प में कि आतंकवादी के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे। इसके लिए विश्व स्तर पर जनमत भी जुटाने में सरकार लगी है। भारत का यह अडिग संकल्प अत्यन्त सराहनीय है। 'आतंकवाद' दबाव का सिद्धान्त है, जिसके द्वारा अपने हठ को दूसरों के ऊपर थोपा जाता है । भारत आतंकवाद' के विरुद्ध सारे विश्व को सजग करता रहा, पर शौर्य के मद में भूले राष्ट्रों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेन्टर पर जब हमला हुआ तब अमेरिका की आँखें खुली। उसने तालिबानों को नष्ट करने की शपथ खायी और अपने अथक प्रयासों से उसने अफगानिस्तान को आतंकवादी चंगुल से मुक्त किया। आज अमेरिका सारे विश्व से आतंकवाद को नष्ट करने की बात करता है। पर, यह तो भविष्य ही बताएगा कि वह आतंकवाद को नष्ट करने में सफल होगा या नहीं। लेकिन यह भी सत्य है कि यदि विश्व के सारे राष्ट्र आतंकवाद को करने का दृढ़ संकल्प ले लें तो आतंकवाद को जड़ से उखाड़ने में ज्यादा देर नहीं लगेगी। आतंकवादी संगठनों का केन्द्रीय स्थल सबको ज्ञात है, पर दृढ़ इच्छा शक्ति के अभाव में उसपर सही समय पर आक्रमण नहीं हो पा रहा है।
प्रदूषण
पर्यावरण मनुष्य की भौगोलिक एवं बौद्धिक उपज है अर्थात् मानव जीवन को पर्यावरण की परिस्थितियाँ व्यापक रूप से प्रभावित करती हैं। मनुष्य को एक 'सन्तुलित परयावरण' की स्थापना करनी चाहिए। लेकिन आज के इस हर क्षण बदलते युग में 'असन्तुलित पर्यावरण की स्थापना हो रही है और इसका सबसे बड़ा उदाहरण है प्रदूषण'।
प्रदूषण वास्तव में जलवायु या भूमि के भौतिक रासायनिक और जैविक गुणों में कोई भी अवांछनीय परिवर्तन है जिससे मनुष्य, अन्य जीवों, औद्योगिक प्रक्रियाओं सांस्कृतिक तत्त्वों तथा प्राकृतिक संसाधनों को हानि पहुँचती है। प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण है- विश्व को बढ़ती जनसंख्या। विश्व की बढ़ती जनसंख्या के कारण ही आज पेड़ काटे जा रहे हैं जो प्रदूषण का सबसे मुख्य कारण है। वृक्षों का वातावरण को संतुलित रखने में बहुत बड़ा योगदान है प्रदूषण कई प्रकार के हो सकते हैं जैसे वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण आदि ।
वायु प्रदूषण सबसे अधिक व्यापक और हानिकारक है। वायुमण्डल में सभी तरह के गैसों की मात्रा निश्चित रहती है और अधिकांशत: ऑक्सीजन और नाइट्रोजन होती है । श्वसन, अपघटन और सक्रिय ज्वालामुखियों से उत्पन्न गैसों के अतिरिक्त हानिकारक गैसों की सर्वाधिक मात्रा मनुष्य के कार्य-कलाप से उत्पन्न होती है । इनमें लकड़ी, कोयले, खनिज तेल तथा कार्बनिक पदार्थों के ज्वलन का सर्वाधिक योगदान है ।
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