समय का महत्त्

समय के महत्त्व को रेखांकित करते हुए किसी कवि ने ठीक ही लिखा है - 'कालि करै सो आज कर, आज करै सो अब पल में परलै होएगी, बहुरी करोगे कब ।। अर्थात् हमें शीघ्रता से समय रहते अपना काम पूरा कर लेना है अन्यथा हम मुँह ताकते ही रह जाएंगे। अंग्रेजी की एक प्रसिद्ध कहावत है, "Time is money' और वास्तविकता भी यही है कि समय धन से भी अधिक मूल्यवान है। परिश्रम द्वारा कमाया हुआ धन यदि नष्ट हो जाए तो उसे पुनः अर्जित किया जा सकता है, लेकिन एक बार बीता हुआ समय फिर दुबारा लौट कर नहीं आता। समय तो ईश्वर का अनुपम वरदान है, जिसे बढ़ाया जा सकता है और घटाया जा सकता है।

मानव के जीवन का प्रत्येक क्षण अमूल्य है। यदि एक क्षण का भी दुरुपयोग होता है तो मानव-सभ्यता का विकास-चक्र रुक जाता है। एक पल की शिथिलता जीवन भर का पश्चाताप बन जाती हैं। उपयुक्त समय पर उपयुक्त कार्य करना चाहिए रोगी के मर जाने पर उसे औषधि प्रदान करने से कोई लाभ नहीं होता है


  छात्र और अनुशासन

सृष्टि के रचयिता ने जिस सृष्टि की रचना की है, वह इतनी नियमपूर्वक चलती है कि उसके एक-एक क्षण का परिवर्तन निश्चित समय पर होता है। सूर्य और चंद्रमा का चमकना, दिन और रात का होना, पेड़-पौधों पर फल-फूल लगना आदि ये सब कार्य इतने नियमित और निश्चित समय पर होते हैं

जिन्हें देखकर आश्चर्य होता है सृष्टि का समस्त कार्य एक निश्चित नियंत्रण या 'अनुशासन' के अधीन चल रहा है अनुशासन शब्द का अर्थ ही शासन (आदेश या नियंत्रण के अनुसार चलना है। अनुशासन एक व्यापक तत्त्व है, जो जीवन के सभी क्षेत्रों को अपने में समा लेता है शासकीय अनुशासन के दो रूप हैं बाह्य और आंतरिक शास्त्रीय, सामाजिक तथा नियमों का पालन करना, गुरुजनों के उपदेश और आदेश को मानना बाह्य अनुशासन है

मन की समस्त वृत्तियों पर और इन्द्रियों पर नियंत्रण आंतरिक अनुशासन है। यह अनुशासन बड़ा भारी महत्त्व है, तथापि विद्यार्थी जीवन में इसकी सबसे अधिक आवश्यकता होती है। विद्यार्थी को अपने भावी जीवन के निर्माण की तैयारी करनी होती है, जो बड़ी कठोर साध ना है इसके लिए विद्यार्थी का अनुशासित जीवन व्यतीत करना अनिवार्य है अनुशासन में रहनेवाला बालक ही देश का सभ्य नागरिक बन सकता है और वही स्वयं को अपने परिवार को तथा स्वदेश को उन्नत बनाने में सहयोग दे सकता है

ऐसी दशा में आंतरिक अनुशासन और व्यवस्था की कल्पना तभी साकार हो सकेगी, जब हमारे हृदय में परिवर्तन हो और हृदय परिवर्तन का श्रेष्ठ समय विद्यार्थी जीवन है। विद्यार्थी का मान एक सुंदर पुष्प है, जिसे साधना रूपी धूप और विचार रूपी जल देकर पूर्ण विकसित करना होता है, ताकि उसकी सुगंध से सारा समाज सुगंधित हो जाय यदि यह पुष्प अनुशासनहीनता के दलदल में पड़ गया तो निश्चित ही इसकी दुर्गंध से सब परेशान हो उठेंगे

16. पर्यटन का महत्व

 

पर्यटन का अर्थ है -घूमना, टहलना, दूर-दूर की यात्रा करना, दर्शनीय स्थानों तक जाना, मिक स्थलों तक जाना, पहाड़ों-नदियों-समुद्र एवं प्राकृतिक स्थलों तक घूम आना। देश विदेश तक घूमना भी पर्यटन के ही अंतर्गत आता है। कुछ लोग हमेशा देशाटन-विदेशाटन करते रहते हैं तो अन्य घर से निकलते ही नहीं। पर्यटन जिन्दगी को हरा-भरा, प्रसन्नता-प्रफुल्लता भरा बनाता है। जिन्दगी जीने का कुछ अर्थ समझ में आने लगता है। किसी ने ठीक ही लिखा हैसैर कर दुनिया की गाफिल, जिन्दगानी फिर कहाँ

जिन्दगी गर रही तो नौजवानी फिर कहाँ? अर्थात् पर्यटन हमें दुनिया भर का करना चाहिए। यह मनुष्य की जिन्दगी बार-बार नहीं मिलती है। जिन्दगी यदि बची रही तो जवानी-जोश-घूमने का जोश शेष नहीं रहता है।

डायबिटीज एवं हृदयरोग से ग्रस्त मानव पर्यटन करने में सक्षम नहीं रहता हैं। बीस वर्ष पचास वर्ष तक की आयु पर्यटन के लिए उपयुक्त मानी गयी है। स्त्रियों के लिए यह उम्र चालीस वर्ष ही हो सकती है। पर्यटन का मनुष्य जीवन में बड़ा महत्त्व है।

पढ़ने लिखनेवाले लोगों के लिए यह और भी महत्त्वपूर्ण हो जाता है। घूमने से अकल खुलती है। घूमने से दुनिया की विविधता देखते ही बनती है। मनुष्य, पशुओं का व्यवहार और प्रकृति का नजारा देखते ही बनता है। पुस्तकों में तो मात्र 25% सांसारिक ज्ञान ही मिलता है। पर्यटन से 75% आखें खुलती हैं। सभ्य मानवों से का सह व्यवहार और असभ्य मानवों के जंगलीपन का अंतर देखते ही बनता हैं। पढ़े-लिखे लोगों में भी जंगली मिल ही जाते हैं।

समासतः हम कह सकते हैं। पर्यटन का महत्त्व मनुष्य जीवन में बहुत है। चाहे सूचनाओं की अपेक्षा या शिक्षा की या मनोरंजन की सभी हम पर्यटन से पाते हैं। वे देश जिन्दा है ना महत्त्व समझा है। वे देश जिन्दादिल है जिन्होंने पर्यटन किया है। और वेरिती के साथ जीने का नाम हैं। किसी