17. साम्प्रदायिकता : एकता के लिए खतरा

 

सम्प्रदाय मनुष्यों के समूह के हित के अनुसार चलने वाले लोगों को कहते समूह, सम्प्रदाय के हितों की रक्षा सम्प्रदाय विशेष में होती है। पूरा सम्प्रदाय मिलकर उसका प्रसार चाहता है। बाद में चलकर कुछ बुराइयाँ, रूढ़ियाँ, अनुदारता, आडम्बर, कुंठाएँ प्रवेश कोई भी धर्म उतना ही सत्य है जितना कि दूसरा। धर्म हृदय में होता है, वह ठेहुने में कर जाती हैं। नहीं होता। मेरा देश ही मेरा धर्म है। मेरा देश ही मेरा संसार है और मेरा धर्म है लोगों की भलाई करना। हमें दूसरों से घृणा करने वाला धर्म नहीं चाहिए। हमें दूसरों से प्यार करने वाला धर्म चाहिए। इस संसार में बहुत सारे देवता हैं, बहुत सारे पंथ हैं और हवा ही हवा है। मनुष्य को विनम्र बनाने वाला धर्म हमें चाहिए।

विश्व में कई तरह का आतंकवाद, प्रसार कर रहा है। उनका धर्म धार्मिक कट्टरतावाद है। उनका विश्वास 'जीओ और जीने दो' में नहीं हैं। उनका विश्वास 'मारों और कब्जा करो में है। सारी दुनिया इस नए प्रकार के आतंकवाद से त्रस्त है।

भारत सभी धर्मों का समान भाव से आदर करता है। वह यहाँ के सभी लोगों हिन्दू, मुसलमान, सिक्ख, ईसाई, पादरी, बौद्ध, जैन का समान आदर करना चाहता है। वह सभी धर्मों के सद्गुणों और सदाचरणों की प्रशंसा करता है। मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च सभी

धार्मिक संस्थाओं की कद्र करना हमारा धर्म है। समासत: साम्प्रदायिकता की भावना हमें नष्ट कर देगी। हमें धर्म-निरपेक्ष रहकर चलना होगा। हमें सर्वधर्म समभाव का रास्ता चुनना होगा।

 

18. पर्यावरण

मनुष्य को यह शक्ति प्रदान की गयी है कि वह कुछ नयी चीजों का आविष्कार कर सके, ताकि उसके सुख-संसाधन बढ़ सके। लेकिन अब तक यह देखा गया है कि वह आविष्कार आविष्कार नहीं बन पाया है, वह ध्वंस और विनाश का उपकरण मात्र बनकर रह गया है। जंगली जानवरों को मनुष्यों ने मारा और पर्यावरण को बुरी तरह प्रदूषित. किया। धरती को मनुष्यों ने दरिद्र बनाया और प्रतिदिन उसे कुरूप किया। बीसवीं शताब्दी में मनुष्य धरती को बहुत नुकसान पहुँचाया, उतना जितना इसके पहले की शताब्दियों में भी उसने नहीं पहुँचाया था।

संसार में अब क्या बचेगा? केवल कंकरीट, पत्थर के मकान और सड़कों पर दौड़ती गाड़ियों के टायर। 

मनुष्य तो दु:खी ही रहेगा-'सब्बं दुखं' पर्यावरण का अर्थ है धरती के ऊपर घेरनेवाला वातावरण-परिवेश हवा प्रदूषित, पानी प्रदूषित और ध्वनि प्रदूषण ने धरती को हिला कर रख दिया है। हमें पर्यावरण की चेतना का संचार करना होगा।

 वन होंगे, तो वर्षा होगी, भूमि का कटाव रुकेगा, रेगिस्तान के पाँव बँध जायेंगे, धरती की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी और हमें अरबों-खरबों रुपयों की नैसर्गिक सम्पदा मिलती रहेगी।