दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

1. 'जीवन-संदेश' शीर्षक कविता का भावार्थ लिखिए 

उत्तर--'जीवन-संदेश' कविता के रचयिता रामनरेश त्रिपाठी हैं। आप खडी बोली के एक श्रेष्ठ कवि हैं। कवि ने यह संदेश दिया है कि मनुष्य को अपना कर्म सदा करते रहना चाहिए। हमें इस पृथ्वी ने बनाया है। हम मनुष्य को इस पृथ्वी पर रहनेवाले मानव-समाज ने बनाया है। अत: उनके प्रति भी हमारा कुछ कर्तव्य है। हमें कर्मवादी और कर्मशील बनना है। हमें पलायनवादी और कर्मचोर नहीं बनना है उत्तर--'जीवन-संदेश' कविता के रचयिता रामनरेश त्रिपाठी हैं। आप खडी बोली के एक श्रेष्ठ कवि हैं। कवि ने यह संदेश दिया है कि मनुष्य को अपना कर्म सदा करते रहना चाहिए। हमें इस पृथ्वी ने बनाया है। हम मनुष्य को इस पृथ्वी पर रहनेवाले मानव-समाज ने बनाया है। अत: उनके प्रति भी हमारा कुछ कर्तव्य है। हमें कर्मवादी और कर्मशील बनना है। हमें पलायनवादी और कर्मचोर नहीं बनना है।

 इस संसार में जितने भी सचर और अचर जीव हैं, सभी अपने-अपने कर्म में संलग्न हैं। सभी अपने-अपने धुन में मस्त हैं। सबके कुछ निश्चित व्रत एवं शपथ हैं। सभी अपने उद्देश्य के अनुसार जीते हैं। पत्ता भी छाया करता रहता है।

 नदी भी धरती की सेवा में रत रहती है। शुद्ध, सुंदर और सुगंधित हवा भी मिठास और सुंदरता बाँटती रहती है। बादल भी वर्षा करने के लिए लालायित रहता है। सूर्य भी शोभा और ऊष्मा की वर्षा करता है। अब हम तो मनुष्य हैं। हममें जन्म से ही अमित बुद्धि-शक्ति, बल विकसित हैं क्या हम उद्देश्य-रहित हैं? क्या हमने अपने जीवन का आवंटित कर्तव्य समाप्त कर लिया है? निष्कर्षत:, कवि रामनरेश त्रिपाठी ने 'जीवन-संदेश' शीर्षक कविता में हमें धरती के

 

प्रति बने कर्तव्य-कर्म के प्रति आगाह किया है 2. जीवन का झरना' शीर्षक कविता का भावार्थ लिखिए ।

 उत्तर-महाकवि आरसी प्रसाद सिंह द्वारा रचित 'जीवन का झरना' शीर्षक कविता एक ऐसी जीवन में गतिशीलता प्रदान करनेवाली कविता है, जिसमें कवि ने मानव जीवन की तुलना निर्झर-बहते झरने से की है । कवि ने बतलाया है कि जिस तेजी व रफ्तार से झरने का पानी बहता जाता है, उसी रफ्तार से मानव का जीवन भी गतिमान रहता है । कवि के कहने का भाव यह है कि व्यक्ति के जीवन में गति होनी चाहिए। जावन में गति होगी, तभी व्यक्ति श्रेष्ठ से श्रेष्ठतर, उत्तम से उत्तम कार्य सफलतापूर्वक कर सकेगा कवि का कथन कितना प्रासंगिक है

 झरने का जल कितना श्रेष्ठ और उदात्त संदेश देता है यह संदेश, मानव जीवन को उर्जस्वित और ऊर्जावान बनाने का रुचिर आह्वान है ।

 वस्तुत: आरसी प्रसाद सिंह अपनी इस कविता में जिस प्रश्न पर विचार करते दिखलाई पड़ते हैं, उसका उत्तर भी वे ही देते हैं, लेकिन उत्तर जान लेने के बाद पाठक के लिए कुछ भी जान पाना शेष नहीं रह जाता । कवि प्रश्न करता है कि यह जीवन क्या है ? उत्तर कवि।

 

इस संसार में जितने भी सचर और अचर जीव हैं, सभी अपने-अपने कर्म में संलग्न हैं। सभी अपने-अपने धुन में मस्त हैं। सबके कुछ निश्चित व्रत एवं शपथ हैं। सभी अपने उद्देश्य के अनुसार जीते हैं। पत्ता भी छाया करता रहता है।

 

नदी भी धरती की सेवा में रत रहती है। शुद्ध, सुंदर और सुगंधित हवा भी मिठास और सुंदरता बाँटती रहती है। बादल भी वर्षा करने के लिए लालायित रहता है। सूर्य भी शोभा और ऊष्मा की वर्षा करता है। सभी कर्म में लगे हैं। तब निष्क्रियता का

 अब हम तो मनुष्य हैं। हममें जन्म से ही अमित बुद्धि-शक्ति, बल विकसित हैं क्या हम उद्देश्य-रहित हैं? क्या हमने अपने जीवन का आवंटित कर्तव्य समाप्त कर लिया है? निष्कर्षत:, कवि रामनरेश त्रिपाठी ने 'जीवन-संदेश' शीर्षक कविता में हमें धरती के

 प्रति बने कर्तव्य-कर्म के प्रति आगाह किया है 2. जीवन का झरना' शीर्षक कविता का भावार्थ लिखिए 

उत्तर-महाकवि आरसी प्रसाद सिंह द्वारा रचित 'जीवन का झरना' शीर्षक कविता एक ऐसी जीवन में गतिशीलता प्रदान करनेवाली कविता है, जिसमें कवि ने मानव जीवन की तुलना निर्झर-बहते झरने से की है कवि ने बतलाया है कि जिस तेजी रफ्तार से झरने का पानी बहता जाता है, उसी रफ्तार से मानव का जीवन भी गतिमान रहता है कवि के कहने का भाव यह है कि व्यक्ति के जीवन में गति होनी चाहिए। जावन में गति होगी, तभी व्यक्ति श्रेष्ठ से श्रेष्ठतर, उत्तम से उत्तम कार्य सफलतापूर्वक कर सकेगा कवि का कथन कितना प्रासंगिक है