दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

जीवन अपने दो छोरों सुख-दुःख को आत्मसात् करते हुए सतत गतिमान होता है । जीवन में सुख भी आते हैं, दु:ख भी आते हैं, लेकिन ऐसा कभी नहीं होता कि सदैव सुखों की वर्षा होती रहे अथवा दुःखों का दारुण दावानल धधकता रहे । हाँ, जो व्यक्ति दुःखों से नहीं घबराता, कष्टों व संकटों के कंटकाकीर्ण पथ पर चलते हुए भी अपने लक्ष्य की प्राप्ति में प्रयत्नशील रहता है, सफलता उसके निश्चित चरण चूमती है । जिस दिन व्यक्ति गतिहीन हो जाएगा, उस दिन उसके जीवन का अवसान हो जाएगा। रुक जाना ही मृत्यु को प्राप्त हो जाना है। प्रस्तुत कविता 'जीवन का झरना' में यह झरना गति का प्रतीक है । कविवर आरसी प्रसाद


सिंह झरने से प्रेरणा लेने के लिए आह्वान करते हैं । निष्कर्षतः, 'जीवन का झरना' शीर्षक कविता में मानव को निरंतर कर्म करने तथा आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा दी गयी है। बढ़ना ही जीवन है । रुकना मृत्यु का द्योतक है। झरना झरकर यह प्रेरणा देता है कि हम जीवनगत विभिन्न परिस्थितियों से घबड़ाकर नहीं, बल्कि उनका कठोरता के साथ मुकाबला करें । जीवन में तभी सच्ची सफलता प्राप्त की जा सकती है। सुंदर का ध्यान कहीं सुंदर है -शीर्षक कविता का भावार्थ लिखिए।


उत्तर हिंदी के यशस्वी कवि गोपाल सिंह 'नेपाली' की कविता 'सुन्दर का ध्यान कहीं सुन्दर है' में मानवीय सौंदर्य और भावना की श्रेष्ठता को रेखाकित किया गया है। ईश्वर ही मनुष्य को सौंदर्य-दृष्टि देता है । लेकिन वह मौन भी रहता है। मंदिर के देवता से बड़ा घट-घट में रमता राम' है। वह मधुर स्वर में बोलता है। यही इस कविता का कथ्य है। अधियारी रातों से मानवीय मुस्कान अधिक सुंदर है। मुख से भी अधिक सुंदर मुख की सुंदरता पर लज्जा का आँचल सुंदर है। कवि ने अन्य लोगों की तरह सारी दुनिया देखी। प्रिय को देखने पर उसमें सब कुछ पाया।


सांसारिक ज्ञान की महिमा से अधिक सुंदर प्रिय की पहचान है। ईश्वर सुंदर है। पर वह जल्दी अपनी ममता का उत्तर नहीं देता है। यह उसकी सुंदरता किंचित निष्ठुर लगती है। मनुष्य के अरमान ईश्वर की कृपा से कहीं अधिक सुंदर लगते हैं। प्रिय की मुस्कान सुंदर है। मंदिर का देवता मौन रहता है। उससे अधिक सुंदर तो मन का देवता है। वह मधुर बोलता


है। अत: मंदिर-मस्जिद-गिरिजाघर से मन का भगवान् कहीं अधिक सुंदर है। प्रिय की मुस्कान


कहीं अधिक सुंदर है। निष्कर्षतः, मनुष्य मंदिर के देवता से अधिक सुंदर है। यहाँ 'नेपाली' जी की मानववादी और मानवतावादी दृष्टि मसृण रूप में प्रकट हुई है। इस कविता का माधुर्य रेखांकित करने योग्य हैं।


रहीम के दो दोहे स्मरण से लिखकर उनका भावार्थ लिखिए।


उत्तर- रहीम (1556-1626) का पूरा नाम अब्दुरहीम खाँ खानखाना है। 'अकबर के दरबार के कवियों में रहीम का मूर्द्धन्य स्थान है । अकबर ने इन्हें अपने नवरलों में स्थान दिया था। जीवन की विपरीत परिस्थितियों को अनुकूल बनाने में उनके दोहे सक्षम हैं ।