दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर Class 12 Bihar Board Exam 2020
पानी गए न ऊबरैं, हैं मोती, मानुष, चून ।'
भावार्थ-अच्छा है।
इस संसार में इज्जत से जीने का महत्त्व है। बेइज्जती के जीवन से मर जाना रहीम इस दोहे में कहते हैं कि मनुष्य को अपना पानी बनाकर जीना चाहिए। मनुष्य को अपने सम्मान की रक्षा करनी चाहिए। पानी चले जाने पर मनुष्य का जीवन जीना निरर्थक हो जाता है। मनुष्य की इज्जत उतर जाने पर उसे कोई नहीं पूछता। सभी उस पर थूकते हैं। पानी चले जाने पर तीन चीजों का संसार में कोई महत्त्व नहीं होता है। मोती का पानी चला जाए तो लोग उसे फेंक देते हैं। मोती की चमक चली जाए तो वह माटी के मोल भी नहीं बिकता। मनुष्य का पानी चला जाय तो उसके जीवन का कोई महत्त्व शेष नहीं रह जाता। मनुष्य की इज्जत चली जाने पर उसे कुंठायुक्त अपमान युक्त और अभिमानरहित जीवन जीना पड़ता है। चूने का पानी चले जाने पर कंकड़-पत्थर की तरह उसे फेंक दिया जाता है। चूने की दीवार में चिपकने की शक्ति चले जाने पर उसे फेंक दिया जाता है। निष्कर्षत: मोती, मनुष्य और चूने के पानी का महत्त्व है पानी चले जाने पर ये तीनों कौड़ी के तीन हो जाते हैं।
द्वितीय दोहा
ज्यों रहीम गति दीप की,
कुल कपूत गति सोड ।
बारे उजियारो करै, अँधेरो होइ ।
भावार्थ-रहीम कवि ने इस दोहे में प्रज्वलित दीप और सुपुत्र को महत्त्वपूर्ण माना है। बुझे हुए दीप और कुपुत्र की कोई प्रशंसा नहीं करता है । सभी उसकी निंदा करते हैं। कवि रहीम कहते हैं कि दीप की गति जैसी होती है पुत्र की गति भी वंश-परिवार में
वैसी ही होती है। दीप जलता है तो प्रकाश होता है। बुझने के पहले दीपक भभक उठता है। कुपुत्र की कुपुत्रता नालायकी बढ़ने पर वंश डूबने की आशंका हो जाती है। निष्कर्षतः कवि रहीम कुपुत्र को सुपुत्र बनने की सलाह देते हैं। नालायक पुत्र कौड़ी के भाव बिकता है। भारतमाता ग्रामवासिनी' शीर्षक कविता का भावार्थ लिखिए ।
उत्तर- भारतमाता ग्रामवासिनी' शीर्षक कविता के रचयिता आधुनिक काल के श्रेष्ठ शीर्षस्थ कवियों में से एक सुमित्रानंदन पंत हैं । उन्हें भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार भी मिल चुका है वे भारत को भारतमाता का सम्मान एवं श्रेणी प्रदान करते हैं। भारतमाता अपनी करोड़ों संतानों को भूखा, नंगा और शोषित नहीं देख सकती है।
कवि कहता है-भारतमाता ग्रामवासिनी है । भारत की आत्मा गाँवों में निवास करती है । गाँव के सभी लोग, स्त्री-पुरुष कृषि कार्यों में संलग्न रहते हैं। गाँव में गरीबों एवं पिछड़ी की कमी नहीं ।
उनकी आँखें, उनकी उदासी सारे राज-गरीबी के खोल देती है ।
भारतमाता अपनी संतानों को दुखी देखकर आँसू बहाती है । गंगा-यमुना भारतमाता के आँसू जल प्रवाह के रूप में बहते हैं। भारतमाता हर घर में बसती है, हर गाँव में बसती है। शहरों में खुशहाली तो आई, लेकिन गाँवों में नहीं आई । हमारी करोड़ों संतानें आज भी भूखी हैं। भारत की धरती अत्यंत उपजाऊ है। वैसे भारत प्राकृतिक संपदा से संपन्न है। फिर भी भारतवासी निर्धन हैं। निर्धन कुंठित हो जाते हैं। कवि को उम्मीद है कि सत्य, अहिंसा और तप के रास्ते चलकर हम अवश्य सफल हो जाएँगे हमें अपने देश पर गर्व है। हमें अपनी मातृभूमि की रक्षा और सेवा अवश्य करनी चाहिए।
निष्कर्षतः भारत एवं भारतमाता पर हमें गर्व है भारत की माता गाँवों में निवास करती 6.. 'हिमालय का संदेश' शीर्षक कविता का भावार्थ लिखिए । उत्तर-रामधारी सिंह 'दिनकर' रचित 'हिमालय का संदेश' शीर्षक कविता भारत की
है।
प्रशंसा में लिखी गयी एक अद्भुत कविता है । दिनकर की कविता में राष्ट्रीयता कूट-कूट कर भरी होती है। इस कविता के माध्यम से एक राष्ट्र के रूप में भारत की चेतना, सक्रियता,
तिशीलता और चंचलता पर प्रकाश डाला गया है । भारत एक संवेदनशील देश है । यह मात्र नक्शे का भारत नहीं है। यह प्रेम, त्याग, सत्य, अहिंसा और अपरिग्रह का भारत है। हमें व्यर्थ ही भारत का नाम नहीं लेना चाहिए। यह मात्र मानचित्र पर मिलनेवाले देश भारत का नाम नहीं है। यह भू पर नहीं है । यह विश्व के लोगों के मनों में बसा हुआ है। धरती पर यदि ऊँचा ले जाने वाला कोई सपना है तो वह भारत देश है। स्वर्ग को धरती पर लाने वाला कोई विचार है--तो वह भारतवर्ष है । भारत एक विचार का पर्याय है-जिसे पाकर मनुष्य जाग खड़ा होता है। भारत एक कमल है, जिसपर कोई दाग नहीं लगता है । भारत एक आध्यात्मिक देश है। यह मनुष्य के अंदर राम को जाग्रत कर देता है। यह देश वैराग्य का संदेश देता है, जिससे आत्मा उज्ज्वल बन जाती हैं। इससे
खिला हुआ
मनुष्य का उदय
है। मनुष्य की सबसे बड़ी आभा और दिव्यता-उच्चता-पवित्रता का प्रतीक भारत है। यह विजय संसार के एक मनुष्य के भीतर की सबसे बड़ी विजय है। निष्कर्षतः, कवि रामधारी सिंह 'दिनकर' ने भारत की श्रेष्ठता- दिव्यता- संवेदनशीलता पर इस कविता में प्रकाश डाला है। भारत के गुणों पर प्रकाश डाला है। कवि ने भारत के होता विशेषणों को सामने लाया है ।
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