21. ईद का त्योहार

 

मानव-जीवन में पर्व-त्योहार महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है क्योंकि यह पर्व अथवा त्योहार हमें समरस बनने की प्रेरणा देता है। इस अवसर पर हम भेदभाव भूल आनंद सागर में गोता लगाने लगते हैं। इसी कारण लोग पर्व-त्योहार काफी प्रसन्नता से मनाते हैं। 'ईद' मुसलमानों के लिए सबसे बड़ा आनंद-पर्व है जिस प्रकार होली हिंदुओं का मौज-मस्ती का त्योहार है, उसी प्रकार ईद मुसलमानों का पर्व है। 'ईद' शब्द का अर्थ होता है -खुशी। सामयिक स्थिति परिवर्तन मुसलमानों का महीना हमारे चैत-बैसाख या अँग्रेजों के जनवरी-फरवरी से भिन्न होता है  

हिंदू सूर्यमास मानते हैं जबकि मुसलमान चंद्रमास उनके बारह महीनों में 'रमजान' का महीना बड़ा ही पवित्र माना जाता है। इस महीने में मुसलमान रोजा रखते हैं अर्थात् दिनभर उपवास करते हैं। इस्लाम की चार पाबंदियाँ हैं (i) नमाज, (ii) रोजा (उपवास), (iii) जकात अर्थात् दान तथा (iv) हज जब रमजान का महीना पूरा हो जाता है, तब उसके अगले महीने 'शव्वाल' की पहली तिथि को ईद का त्योहार मनाया जाता है

इसे 'ईद-उल फितर' भी कहते हैं इस दिन लोग अपने मित्रों, संबंधियों तथा पड़ोसियों को दावत देते हैं सभी एक-दूसरे को ईद मुबारक, ईद मुबारक कहकर मुबारकबाद देते हैं। घर आए मेहमानों को सेवई तथा मिठाइयों से मुंह मीठा किया जाता है लोग अपने वस्त्रों पर इत्र लगाते हैं इत्र लगाना मुसलमानों का सुन्नत है निष्कर्षतः यह कहा जा सकता है कि ईद खुशी तो लाती ही है, साथ-साथ साधना अर्थात् परिश्रम करने की प्रेरणा भी देती है।

 

22, कुपोषण

 

भारत की जनसंख्या 121 करोड़ हो गयी है। यहाँ बच्चे कुपोषण के शिकार हैं। गर्भवती माताएँ कुपोषण की शिकार हैं। लगभग 50% घरों में दोनों शाम चूल्हा नहीं जलता है। गाँव के मजदूर और पिछड़े लोग भोजन, वस्त्र और आवास की कमी से जूझ रहे हैं। फल, दाल, दूध एवं अंडा जैसा पौष्टिक आहार सभी को नहीं मिलता। इस बीमारी से भारत को जूझना हैं। भारत को गरीबी से मुक्ति दिलाना है। भारत को कुपोषण से मुक्ति दिलाना है।

भारत में कुपोषण से बुरा हाल लोगों का है। दुनिया के हर तीन बच्चों में एक भारतीय बच्चा कुपोषण का शिकार है उड़ीसा, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, बंगाल और बिहार में कुपोषितों की संख्या अधिक है। यदि भारत स्वस्थ नहीं होगा तो विकास कैसे करेगा? उन्नति तभी पूरी तरह होगी, जब सभी लोग कुपोषण (रद्दी भोजन, कम भोजन) की समस्या से होंगे। मुक्त कुपोषण से बच्चे ग्रस्त हो जाते हैं। कुपोषण से माताएँ अभिशप्त हो जाती हैं। कुपोषण से गर्भवती महिलाएँ स्वस्थ बच्चा नहीं जन पाती। नवजात शिशु कुपोषण के कारण सुबह के चिराग हो जाते हैं।

गाँव के मजदूर कुपोषण के कारण टी०बी०की चपेट में जाते हैं। गरीबी एवं कुपोषण के कारण माताएँ अपने नवजात शिशुओं को स्तन का दूध नहीं पिला पातीं। बच्चे पानी पीकर कैसे बढ़ेंगे? कुपोषण एक बड़ी समस्या है गरीबी से भी बढ़कर। जन-स्वास्थ्य, शौचालय, शुद्ध पेयजल और स्वास्थ्य संबंधी साधारण जानकारी का महत्त्व बताना होगा। सफाई का महत्त्व रेखांकित करना होगा।

गंदा पानी पीने से लोगों को बचाना होगा। गंदगी और कीड़ों-मच्छरों से बचना सीखाना होगा। पौष्टिक भोजन के तत्त्वों-घटकों को बताना होगा। डायरिया और डिसेंटरी से बचना होगा। जन स्वास्थ्य की रक्षा के लिए आधुनिक सिवरेज बनाना होगा। सभी शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पानी पहुँचाना होगा सेप्टिक टैंक बैठाना होगा और सार्वजनिक शौचालय के निर्माण पर बल देना होगा।"