निबंध -चरित्र की महत्ता | आदर्श पुरुष : महात्मा गाँधी | BIHAR BOARD 2020 |
23. चरित्र की महत्ता
एक बहुत पुरानी सूक्ति है : If wealth is lost, nothing is lost, If health is lost, something is lost, If character is lost, everything is lost. यदि आपकी धन-संपत्ति का क्षय हो जाता है, तो एक प्रकार से आपका कुछ नहीं खोया है, यदि आपका स्वास्थ्य नष्ट हो गया है, तो आपकी थोड़ी-सी हानि हुई है और यदि आपका आचरण आपका साथ छोड़ जाता है, तो आपका सर्वस्व चला जाता है । आचरण का अर्थ सामान्यतः यौन-संबंधों, स्त्री-पुरुष विषयक संबंधों से लगाया जाता परंतु आचरण का यह बहुत ही सीमित अर्थ है ।
आचरण वस्तुतः समस्त व्यक्ति को, व्यक्ति के समग्र शील-स्वभाव को समाहित करता है। चरित्र के अंतर्गत व्यक्ति के मन, वचन एवं वाणी से संबंधित समस्त प्रक्रिया एवं कार्य-कलाप आ जाते हैं । इतना ही नहीं, व्यक्ति का चेतना-विकास भी उसके चरित्र का अंग बनता है, क्योंकि चेतना-विकास के अनुरूप व्यक्ति की इच्छाशक्ति का स्वरूप निर्धारित होता है ।
इच्छाशक्ति वासना का पारमार्थिक रूप है । इच्छा अथवा वासना विचार उत्पन्न करती है। विचार वासना को कार्यान्वित करने की योजना निर्धारित करता है और हमारी कार्यशक्ति उस योजना को कार्यान्वित करती है। इच्छा, ज्ञान, क्रिया अथवा वासना; विचार एवं क्रिया-कलाप का चक्र अबाध गति से चलता रहता है, क्योंकि ये तीनों अन्योन्याश्रित हैं।
इस समस्त प्रक्रिया
के नवनीत रूप से चरित्र नामक
तत्व का निर्माण होता
है, जो हमारे व्यक्तित्व
का स्वरूप बनता है । आत्मतत्त्व
होने के कारण चरित्र
हमारी स्थायी संपत्ति है। अत: चरित्र को उज्ज्वल और
पवित्र रखना की अस्मिता भी
है और उसका प्राप्तव्य
भी ।
आदर्श पुरुष : महात्मा गाँधी
महात्मा गाँधी भारत की तपोभूमि के महान् सपूत थे उन्होंने सत्य को ईश्वर माना और धर्म को अहिंसक आचरण के रूप में ग्रहण किया । महात्माजी का व्यक्तित्व अपने-आप में सत्य, अहिंसा और प्रेम का सच्चा स्वरूप था ।
उनकी संपूर्ण जीवन-यात्रा अपने आप में समकालीन विश्व की मानवता को संत्रास, शोषण, ईर्ष्या-द्वेष आदि से मुक्ति दिलानेवाले सत्यनिष्ठ महापुरुष की अपराजेय आत्मा का विरल साक्ष्य है । समकालीन विश्व का मानव-समुदाय अपने जीवन के अंधकार से जूझने के लिए गाँधीजी के संदेशों में आशा की किरण खोज रहा है।
वैज्ञानिक और तकनीकी ऊँचाइयों के शिखरों को छूनेवाले समृद्ध देशों ने भी आंतरिक शांति, शुचिता और सुख के लिए महात्मा गाँधी में मानवता की अज्ञात आत्मा को पहचानना शुरू कर दिया है। अब गाँधीजी इनके लिए भी धातु में गढ़ी सजावट की बेजान मूर्ति न लगकर स्पंदित प्रेरणा-पुरुष प्रतीत हो रहे हैं। महात्माजी ने अपनी जीवनी को सत्य का प्रयोग कहा। वस्तुतः गाँधीजी के सारे सोच-विचार, क्रिया-कलाप, कार्यक्रम आदि अपने-आपमें 'सत्यमेव जयते' के विरल भारतीय संकल्प को अद्भुत रूप से सार्थक करते हैं निश्चयपूर्वक गाँधीजी ने अपने देशवासियों के साथ विश्वमानवता की जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए अपनी अंतरात्मा की पुकार पर बुनियादी समस्याओं का सही हल खोजने का अथक प्रयत्न किया ।
ऐसा करते हुए उन्होंने दुनिया के कुछेक महापुरुषों की तरह सर्वोच्च बलिदान दिया। सचमुच गाँधीजी की शहादत अपने-आप में विश्वशांति और मानव-प्रेम से जुड़ा हुआ बहुत बड़ा प्रश्न है और उत्तर भी। इसीलिए वे आज भी प्रासंगिक हैं और भविष्य में भी रहेंगे।
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