योग : स्वास्थ्य के लिए लाभदायक
29. योग : स्वास्थ्य के लिए लाभदायक
योग एक जीवन जीने की कला का नाम है । यह एक ऐसी पद्धति है जिससे शरीर स्वस्थ, मन प्रसन्न एवं वाणी में संयम आता है। योग-शिक्षा का यही उद्देश्य है । 'योग : चित्तवृत्ति निरोध'। 21 जून को प्रतिवर्ष योग-दिवस मनाने का आह्वान यू०एन०ओ० ने किया है। 2015 में प्रथम बार अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया। पूरी दुनिया के 190 देशों में यह मनाया गया। भाग लेने वाले बालकों, युवकों और वृद्धों में शक्ति का नव संचार हुआ।
गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में 35,985 लोगों ने एक साथ योग कर नाम दर्ज कराया। इस वर्ष के योग में 84 देशों का हिस्सा लेना भी एक रिकार्ड बना। इस वर्ष 192 देशों के 251 शहरों में आयोजन हुआ।
योग हमें असत्य से सत्य की
ओर उन्मुख करता है। यह अंधकार से
प्रकाश की ओर ले
जाता है। यह हमें अमरता
की ओर ले जाता
है। यह हमें मृत्यु
से भी मुक्त कराता
है।
योग
एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ
है जोड़ना। योग ईश्वर के साथ हमें
जोड़ता है। योग एक विज्ञान है,
वह एक व्यावहारिक मनोवैज्ञानिक
पद्धति है यह जीवन
का लक्ष्य प्राप्त करने का एक उपाय
ही नहीं है, अपितु इसके द्वारा कोई भी सांसारिक कार्य
बड़ी तत्परता के साथ तथा
दूसरों का महाकल्याण करते
हुए किया जा सकता है।
योग : स्वास्थ्य व आरोग्य का सही मार्ग' बताते हुए बासवरेड्डी ने ठीक ही लिखा है- योग, अत्यन्त सूक्ष्म विज्ञान पर आधारित एक आध्यात्मिक अनुशासन है, जो मन और शरीर के मध्य समरसता करने पर केंद्रित है। यह स्वस्थ जीवन जीने की कला और विज्ञान दोनों है। योग का यह समग्र दृष्टिकोण भली -भाँति स्थापित है और यह जीवन के सभी क्षेत्रों में सामंजस्य लाता है ।
इस
प्रकार, यह रोग निवारण,
स्वास्थ्य विकारों पर नियंत्रण कायम
करने के लिए जीना
जाता है। योग को व्यापक रूप
से 2700 ईसवी पूर्व सिंधु सरस्वती घाटी सभ्यता की एक 'अमिट
सांस्कृतिक विरासत' के रूप में
माना जाता है।
30. भारत के गाँव
भारत
गाँवों का देश है
। यहाँ लगभग 75% प्रतिशत जनसंख्या गाँवों में निवास करती है। भारत की सच्ची झाँकी
गाँवों में देखी जा सकती है
। इसकी उन्नति नगरों पर नहीं, अपितु
गाँवों पर निर्भर करती
है । अत: ग्रामोन्नति
का कार्य देशोन्नती का कार्य है
। पंत ने 'भारत माता ग्राम-वासिनी' नामक कविता में ठीक ही कहा है
ब्रिटिश
शासनकाल में ग्रामीण जीवन की ओर विशेष
ध्यान नहीं दिया गया; इसकी पूर्णरूपेण उपेक्षा की गई है
किंतु स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् हमारी
सरकार ने गाँवों की
प्रगति के लिए भारी
प्रयत्न किया । यहाँ की
आर्थिक दशा को सुधारने के
लिए कृषि की प्रगति की
गई जिसके फलस्वरूप देश के कृषि उत्पादन
में काफी वृद्धि हुई। सिंचाई के नए-नए
साधन जुटाए गए। पहले गाँवों में छोटे-छोटे कच्चे मकान होते थे जो अधिक
वर्षा होने के कारण गिर
जाते थे। आज अधिकांश घर
पक्के हैं। वैसे पूर्वी भारत में अब भी कच्चे
मकान हैं। सरकार ने शिक्षा के
क्षेत्र में विशेष ध्यान दिया है । अब
प्रायः सभी गाँवों में प्राथमिक पाठशालाएँ हैं । उच्चतर माध्यमिक
विद्यालयों की संख्या भी
गाँव में बढ़ाई जा रही है
।
प्रौढ़-शिक्षा की ओर विशेष
ध्यान दिया जा रहा है
। पहले शिक्षा की ओर कम
ध्यान दिया जाता था, आजकल कृषि की शिक्षा पर
बहुत बल दिया जा
है । कहीं-कहीं
अभी तक हमारे गाँव
पिछड़े हुए हैं। सफाई तथा स्वास्थ्य शिक्षा की कमी है।
वहाँ शिक्षा के क्षेत्र में
काफी सुधार की आवश्यकता है।
गाँव के किसान अब
भी अंधविश्वासी हैं। उनका भूत-प्रेत में विश्वास है। ग्रामीण उद्योग-धंधों की ओर बहुत
कम ध्यान दे रहे हैं,
पर अब भी इसमें
विशेष रूप से ध्यान देने
की आवश्यकता है यदि ग्रामीण
जीवन में सुधार होगा तो देश खुशहाल
होगा। हमारे देश की सच्ची प्रगति
गाँवों के विकास पर
ही निर्भर है। हमारी सरकार गाँवों के विकास के
लिए काफी प्रयत्नशील है। दूरदर्शन ने शहरी जनता
के समक्ष गाँवों की दुर्दशापूर्ण स्थिति
को नंगा कर दिया है।
किसी बड़े पदाधिकारी के आगमन से
एक-दो दिन पूर्व
गाँवों में सफाई आदि करा दी जाती है।
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