निबंध -युवा-आक्रोश| भूमंडलीकरण | BIHAR BOARD 2020 |
31. युवा-आक्रोश
भारतवर्ष
के युवकों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
सुनिश्चित नौकरी का अभाव, शिक्षा
का अधूरापन, ऋणात्मक व्यक्तित्व का विकास, इत्यादि
कारणों से युवक क्रोधमय-आक्रोशमय एवं चिड़चिड़े होते जा रहे हैं।
पढ़ने की प्रवृत्ति घटती
जा रही है। व्यक्तित्वहीन छात्रों की लिपि भी
खराब होती जा रही है।
युवा
आक्रोश का सबसे बड़ा
कारण पोषक वातावरण का अभाव है।
व्यक्तित्व का निर्माण वंशपरंपरा
एवं वातावरण से होता है।
वंश परंपरा में परिवर्तन नहीं किया जा सकता वह
मनुष्य के हाथ में
नहीं है। वातावरण को सुधारा जा
सकता है। लेकिन गरीब छात्रों के घरों का
वातावरण तनावपूर्ण होता है। अमीर छात्रों के घरों का
वातावरण अनुशासन विहीन हो जाता है।
हिन्दी मध्यम वाले विद्यालय उचित और पर्याप्त शिक्षा
नहीं दे पाते। अंग्रेजी
माध्यम के विद्यालय शिक्षा
तो स्तरीय देते हैं लेकिन छात्रों को केवल रटना
पड़ता है। गृहकार्य के बोझ और
मनोरंजक एवं खेलकूद के अभाव के
कारण छात्र क्रोधी हो जाते हैं।
कोई भी सरकार वातावरण
के सुधार एवं उन्नयन पर ध्यान नहीं
देती। सरकारों का ध्यान लट
की तरफ ज्यादा और शिक्षा की
तरफ कम होता है।
स्कूलों
का वातावरण उत्साहवर्द्धक नहीं पाया जाता है। शिक्षित छात्र भी उत्कृष्ट व्यवहार
नहीं कर पाते। माता-पिता का अपमान, गुरु
का अपमान वे अक्सर करते
पाए जाते हैं। उत्कृष्ट शिक्षा छात्रों को नहीं मिल
पाती है। उनमें गुणवत्ता का संचार नहीं
हो पाता है। छात्रों के पास केवल
मोटे कागज पर छपी डिग्री
है। अत: गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा देने का प्रयास भारत
को करना होगा। कई बार तो
शिक्षक भी गुणवत्तापूर्ण नहीं
पाए जाते। वे केवल वेतन
लेने शिक्षण संस्थानों में आते हैं। छात्रों में क्रोध, गुस्सा, चिड़चिड़ापन बढ़ता रहता है।
युवा-आक्रोश का एक प्रमुख
कारण उज्ज्वल भविष्य की जगह अंधकारमय
भविष्य का दिखाई पड़ना
है। 1,00,000 परीक्षार्थियों में 2,000 को नौकरी मिलती
है। नौकरी नहीं मिलने की उम्मीद से
युवक-युवती निराश जीवन व्यतीत करने लगते हैं युवक-युवतियों में यह आत्मविश्वास ही
नहीं पनपता है कि उन्हें
भी जीविका मिलेगी । वे निराश
हो उठते हैं ।
32. भूमंडलीकरण
भूमंडलीकरण
का सीधा अर्थ है सारी धरती
के लोग एक हैं। उनकी
चाहत एक हैं। वे
उन्नति और विकास चाहते
हैं। वे उच्च जीवन
स्तर चाहते हैं। वे विज्ञान का
लाभ उठाना चाहते हैं। वे सारे संसार
से सुख खरीदना चाहते हैं। वे संसार की
सुविधाएँ चाहते हैं। वे धरती को
स्वर्ग बनाकर रहना चाहते हैं। वे पूँजी का
लाभ कमाना चाहते हैं। वे खरबपति बनना
चाहते हैं। यही है बाजारीकरण। यही
है भूमंडलीकरण यही है आर्थिक उदारीकरण।
भूमंडलीकरण
में बाजारवाद हावी हो जाता है
। बाजार जो चाहता है
वह बनाता है और वही
चीजें बेचता है। चीजें महँगी होती हैं। पूँजी लगाने वालों को लाभ होता
है। कीमतें आसमान छूने लगती हैं। सुख की वर्षा होने
लगती है। पूरे संसार में चीजों के दाम एक
होने लगते हैं। अपने उत्पादों का पेटेंट करवाना
होता है। जिसका पेटेंट होता है, वह लाभान्वित हो
जाता
Post a Comment
0 Comments