निबंध - नारी-शिक्षा | Bihar Board |
निबंध
1. नारी-शिक्षा
आज शिक्षा का महत्त्व संसार में बढ़ गया है । पुरुष शिक्षा ही नहीं अब नारी-शिक्षा भी आवश्यक हो गयी है। नारी और पुरुष इन दो पहिओं पर मनुष्य के परिवार की जिंदगी चलती है।
शिक्षा नारी के जीवन में क्रमश: अंतर लाती है। एक शिक्षित माँ बच्चों को शिक्षा भली प्रकार दे सकती है। एक अशिक्षित माँ को शिक्षा देने में कठिनाई होती है । नारी शिक्षित होने पर परिवार की आमदनी दुगुनी बढ़ जाती है । शहरों का खर्च बढ़ गया है । एक पुरुष किंतना कमाएगा। यदि एक नारी भी परिवार में कमाने लगती है, तो.
गाड़ी आसानी से चल निकलती है। शिक्षित नारी की राय मानी जाती है। वह परिवार और राष्ट्र के विभिन्न मामलों में अपना मत दे सकती है । शिक्षित नारी दवा का नाम पढ़कर रोगी को दवा देगी।
अब वह जमाना नहीं रहा कि केवल पुरुष ही काम कर सकते हैं। अब नारी भी वे सभी कार्य कर सकती जो पुरुष करते थे। हवाई जहाज चलाना, सैनिक बनना, शिक्षक बनना इत्यादि दु:साध्य कार्य भी अब नारियाँ आत्मविश्वासपूर्वक कर रही हैं। पहले मैथिलीशरण गुप्त ने कहा था
'अबला जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी । आँचल में है दूध और आँखों में पानी ॥' लेकिन अब जमाना बदल गया है । सुरेन्द्र शर्मा ने लिखा है
अबला मरदा हाय तुम्हारी यही कहानी । चेहरे पर है मूँछ और आँखों में पानी ॥
अब स्त्रियों के हँसने और पुरुषों के रोने का समय आ गया है । अब स्त्रियों के पढ़ने
और पुरुषों के रसोई बनाने का समय आ गया है ।
शहरों में नारियाँ अब धड़ल्ले से शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। सरोजिनी नायडू, इंदिरा गाँधी, एनी बेसेन्ट लक्ष्मीबाई, मीराबाई, महादेवी वर्मा, सोनिया गाँधी, जयललिता और ममता बनर्जी का नाम कौन नहीं जानता ? ये महिलाएँ बहुत मायने में पुरुषों से भी आगे हैं। आज आवश्यकता है शहरों के साथ-साथ गाँवों की स्त्रियों को भी शिक्षित करने की। शिक्षा मनुष्य को सामंजस्य सिखलाती है । पढ़ी-लिखी स्त्रियाँ परिवार, समाज और देश विदेश में अच्छे सामंजस्य का उदाहरण पेश कर रही हैं। अब स्त्रियाँ पैरों की जूती नहीं
रह गयी हैं। अब वे—देवी, माँ, सहचरी और प्राण बन गयी हैं। आवश्यकता है पुरुष-स्त्री दोनों को शिक्षित करने की ।
केरल, बंगाल एवं अमेरिका में अब स्त्रियाँ पुरुषों के बराबर यौन स्वातंत्र्य और स्वच्छंदता का उपभोग भी कर रही हैं। शिक्षा ज्यों-ज्यों बढ़ेगी, स्त्रियों की आजादी उतनी ही बढ़ेगी । नारी शिक्षा से राष्ट्र की शक्ति भी दुगुनी हो जाएगी । नारी शिक्षा से विकास और प्रगति
की रफ्तार भी दुगुनी हो जाएगी।
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