निबंध - गणतंत्र दिवस | मेरे प्रिय शिक्षक | BIHAR BOARD 2020 |
3. गणतंत्र दिवस
26 जनवरी, 1950 को भारत का लिखित संविधान स्वीकृत और घटित हुआ था। भारत संप्रभुता सम्पन्न लोकतंत्रात्मक गणराज्य घोषित हुआ । भारत अपने संविधान के अनुसार लोगों की आर्थिक आजादी के लिए भी काम करेगा।आज अभी आर्थिक आजादी का हमारा सपना पूरा नहीं हुआ है। लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर लाना है । आर्थिक उन्नति की दौड़ में पिछड़ गयी जातियों को उन्नत जातियों के
समकक्ष लाना होगा । तभी आजादी सही होगी। तभी संविधान भी सही होगा। 15 अगस्त, 1947 का प्रात:काल वह स्वर्णिम सुप्रभात था, जब विश्व की राजनीतिक रंगमंच पर अभिनव भारत का अभ्युदय हुआ और उस विशाल साम्राज्य का अवसान प्रारंभ हुआ, जिसके अंतर्गत सूर्यास्त होता ही नहीं था । यह अभूतपूर्व घटना भारतवासियों के पूर्वजों के त्याग, बलिदान तथा कृत्यों का परिणाम थी । साथ-ही-साथ ब्रिटिश जाति के लोकतंत्रीय आदर्श एवं ऐतिहासिक परंपराओं की पूर्ति भी थी । प्रत्येक राष्ट्र के लिए एक संविधान अनिवार्य होता है ।
संविधानविहीन राष्ट्र की कल्पना नहीं की जा सकती । संविधान उन नियमों का संकलन होता है, जिनके आधार पर राष्ट्र का शासन संचालित होता है । 26 जनवरी भारतवासियों का सबसे महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय पर्व है । उसी दिन रावी-तट का प्रण अक्षरशः पूरा हुआ और भारत एक धर्मनिरपेक्ष लोक-कल्याणकारी संप्रभुत्वसम्पत्र गणराज्य बना । यह दिन हमारे पूर्वजों की प्रतिज्ञाओं, तपस्याओं, त्यागों एवं बलिदानों का स्मृति दिवस है। यह राष्ट्रीय पर्व समस्त भारत में बिना किसी भेदभाव का मनाया जाता है ।
मेरे प्रिय शिक्षक
मेरे प्रिय शिक्षक डॉ० अनन्त लाल चौधरी हैं। वे मेरी चेतना को जागृत करते हैं। वे मुझे ईश्वर की तरह मेरी आत्मा को आशीष देते हैं। वे अनन्त ज्ञान के पुञ्ज हैं। वे अनन्त ज्ञान हम छात्रों के अंदर उड़ेल देते हैं। वे यह नहीं बतलाते हैं कि उनका प्रभाव कहाँ तक जाकर समाप्त होगा। वह अनन्त तक जाकर रुकेगा भी या नहीं यह वह नहीं बतलाते हैं। वे मेरी दृष्टि में सच्चे शूर-वीर हैं। वे मेरे लिए मेरे रक्त-संबंधियों से बढ़कर। मेरे गुरु मेरी प्रशंसा कर मुझे खुश कर देते हैं। ऐसा कोई जादू हमने किसी दूसरे व्यक्ति
में नहीं देखा है। मेरी अच्छी बौद्धिक शक्ति को वे और धारदार बना देते हैं। मुझमें वे और भी पढ़ने की इच्छा जागृत-पुनर्जागृत कर देते हैं। मैं उनकी कितनी भी प्रशंसा करूँ- कम ही होगी। एक अच्छा शिक्षक छात्रों के बेहतरीन को बाहर निकालता है। एक बड़ा शिक्षक यह जानते हैं कि उनका शिष्य आसमान में कहाँ तक उड़ेगा। मेरे प्रिय शिक्षक तेजस्वी हैं। वे झरने के पानी की तरह ज्ञान की वर्षा करते रहते हैं। वे छात्रों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। वे विस्तृत अध्ययन करने की प्रेरणा देते हैं। वे कुछ प्रश्नों
की गहराई के साथ अध्ययन करने की सीख देते हैं। वे पुस्तकें खरीदकर पढ़ने की प्रेरणा देते हैं। वे बतलाते हैं कि पुस्तकें सोचने की मशीन हैं । वे ऐसी शिक्षा देते हैं कि हम सीखकर उस ज्ञान की कार्य रूप में परिणत कर सकते हैं। वे हमें दिव्य ज्ञानी बनाने वाले पारदर्शी व्यक्तित्व वाले शिक्षक हैं। वे हमें जीतने की शक्ति भरते हैं। वे हमारे संसार को देखने और
तौलने के दृष्टिकोण को भी विकसित करते हैं। समासतः मेरे प्रिय शिक्षक डॉ० अनन्तलाल चौधरी मुझे बहुत अच्छे लगते हैं। सभी को
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